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Hymn No. 1535 | Date: 25-Jan-2000
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जनमो – जनम की अधूरी तलाश पूरी करने निकला हूँ आज।
जनमो – जनम की अधूरी तलाश पूरी करने निकला हूँ आज।
दिल में है तसवीर यार की, मन में है परम् विश्वास।
आँखें परिपूर्ण है भावों से, कदम थिरकने को है बेताब।
उमंगों से भरा है मन, तेरे सिवाय ना है जरूर किसी और की।
बेखौफ हो चुका हूँ, हर डर – डरके भाग रहा हें मुझसे।
जो ना था पता, वो पता चला आज, इस अनाथ का तू हैं नाथ।
गाथा जो गाया करता था कभी, बेताब हो रहा हूँ गाने को।
सारी हसरतें बदल गयी एक-एक करके, मिलते ही तुझसे।
सदियों से रहा हूँ दास तेरा, कैसे रहा इस दास के बिना अब तक।
तुझे ना है जरूरत तो क्या, जरूरत है इस आधे – अधूरी को तेरी।


- डॉ.संतोष सिंह