VIEW HYMN

Hymn No. 1551 | Date: 04-Feb-2000
Text Size
कूट – कूट के भर दे प्रेम हमारे अंदर नजरों से झलके प्रेम का समंदर।
कूट – कूट के भर दे प्रेम हमारे अंदर नजरों से झलके प्रेम का समंदर।
कंठ से जब फूटे प्रेम भरे गीत, झर-झर-झरने लगे प्रेम का झरना।
स्वरों में घोल दे मिश्री, जब गूँजे समा में बन अमृतमय प्रेम का गीत।
सदियों से हारा हुआ जीत लेगा आशीष से तो दिल को।
उथल – पुथल पैदा कर दूँगा तेरे मन में प्रेम भरा स्वर बस छेड़के।
चाहे कुछ भी होता रहे मेरे संग, बाज न आऊँगा करने से प्रेम तुझे।
अंदाज होगा इतना निराला, चाहे या न चाहे आयेगा तू खींचा चला।
भला – बुरा होता रहे कुछ भी तेरे संग, मैं रंगूँगा तुझे प्रेम रंग में।
जंग जारी रहेगी तब तक, जब तक तोड़ ना दूँ प्रेम की हर सीमा।
धीमा ना पड़ने दूँगा अपनी चाल को, प्यार पाये बिना तेरा रूकना रास न आयेगा।


- डॉ.संतोष सिंह