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Hymn No. 1552 | Date: 05-Feb-2000
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चलतें - चलते चले जाना है मंजिल की ओर।
चलतें - चलते चले जाना है मंजिल की ओर।
दिल में समायी होगी प्रेम भरी छवि उसकी।
आँखों में होंगे आँसू, निर्झर प्यार देखके उसका।
गूँजेंगे हर पल मन में, प्रेम के गीत उसके।
लब रहेगे हर पल बेचैन, नाम लेने के लिये उसका।
लायकीयत ना देखी उसने, रखा पल – पल पास अपने।
हाय जो किस्मत में न था, कर डाला इनायत इतनी।
जतन जो ना कर पाया, लुटाने आया हूँ उसे तुझपे।
औकात ना है सौगात देने की, फिर भी श्रध्दा से किया अर्पित।


- डॉ.संतोष सिंह