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Hymn No. 1553 | Date: 05-Feb-2000
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दिल से निकले कोई गीत ऐसा, जो दूँ ले तेरे मन को।
दिल से निकले कोई गीत ऐसा, जो दूँ ले तेरे मन को।
मचल पड़े तेरा दिल भी, सुर से सुर मिलाने के वास्ते।
बंध जायेगा कुछ ऐसा समाँ, सुध – बुध खो देंगे तुझमें।
बह निकलेगा प्यार का ज्वार, खुल जायेगे बंद दिलों के दरवाजे।
ना होगा वहाँ कोई अपना पराया, झूमेंगे मस्ती में सब बनके एक।
भेद का किस्सा हो जायेगा तमाम, प्यार का किस्सा जब होगा आम।
नाम में ना है कुछ रखा, नाम मिटने पे प्यार ही काम आया है।
सताने न आया हूँ, हम खुद ही सताये हुये है प्यार के।
दामन पे जो लगा है दाग, लग जाने दे, प्यार हमको कर लेने दो।


- डॉ.संतोष सिंह