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Hymn No. 1590 | Date: 01-Mar-2000
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ऐ। परम् पिता गुजारिश है तुझसे इतनी, कर दे मेरे प्रिय को तू ठीक।
ऐ। परम् पिता गुजारिश है तुझसे इतनी, कर दे मेरे प्रिय को तू ठीक।
कदम हमारे भोगें तू, मुझसे बड़ा कोई खल – कामी नहीं है संसार में।
इक् बार नहीं कई - कई बार किया हैरान, फिर सुध ना लिया पिता का।
कहता हूँ तुझसे मेरे करमों का भार दे दे मुझे, ना तू सह प्रिय खुद पे।
औकात ना है मेरी सहने की तो क्या, सह जाऊँगा तेरे आशीष से।
सदा कुछ ना कुछ है किया तू मेरे वास्ते, मौका दे दे तू आज कुछ करने का मुझे।
लानत – मानत से सुधरने वाला नहीं, डूबो दे मेरे रोम – रोम को दर्द के दरिया में।
मैं स्वस्थ देखना चाहता हूँ तुझे हर पल, चाहे कोई भोग – भोगना पड़े मुझे।
खोजे ना मिलेगा संसार में इष्ट मुझ जैसा, फिर भी प्रिय ना होना तू रूष्ट मुझसे।
छोटी सी दरखास्त करता हूँ तुझसे, तेरा नाम लेते रहने का आशीर्वाद तू देना।


- डॉ.संतोष सिंह