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Hymn No. 1688 | Date: 25-Apr-2000
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नजरों में नजर डाले बैठा रहूँ तेरे सामनें गुजर जाये जमाना सारा।
नजरों में नजर डाले बैठा रहूँ तेरे सामनें गुजर जाये जमाना सारा।
हो जाये कुछ हो ना खबर हमको, बेखबर हो जाउँढ प्यार में तेरे।
कहना हो कितना भी कुछ, कहना ना पड़े कभी कुछ, कह डालूँ नजरों से सब कुछ
निकला हूँ राहें प्यार पे, हाथ पकड़ के तेरा, गुमां ना हो – होने का साथ तेरे।
दिया हुआ है सब कुछ तेरा, लुटाने की पारी आये जब तो न आये मन में कोई हिचक।
कसक बढ़ती जाय तेरे प्यार के वास्ते, तूट जाये मन की सारी हिचक।
निकला हूँ और तेरे, पीना पड़े चाहे जीवन का जहर कितना भी।
रहबर कितना भी तू बरसाना कहर, पर करते जाना कृपा सहने के वास्ते।
मेरी दास्ता है बहुत नीरस, जो पहलू जुड़ा है तुझसे रंग ली है इसी में।
टूटने ना देना सिलसिला यादों का ज्यों हो जाये खत्म सिलसिला श्वासों का।


- डॉ.संतोष सिंह