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Hymn No. 1687 | Date: 25-Apr-2000
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बेधड़क होके गाना चाहता हूँ गीत तेरा, दे संगी मेंरे दिल की धड़कन।
बेधड़क होके गाना चाहता हूँ गीत तेरा, दे संगी मेंरे दिल की धड़कन।
होश होके हो जाना चाहता हूँ मस्त तेरे वास्ते, बिन कारण थिरके कदम मेरे।
घिर जाऊँ आनंद से इतना, आये जीवन में कैसा भी पल भूलूँ ना मैं तुझे।
झूठ – सच सब कुछ है मंजूर मुझे, रखना चाहता हूँ सरोकार सिर्फ तुझसे।
कोई करे कुछ भी साथ मेरे, मेरे विश्वास को ना टूटने देना कभी तुझपे से।
सह जाता हूँ सब कुछ, सह नहीं पाता दिल की जलन जो उपजे जुदाई से तेरे।
गोया सब कुछ ठीक है, जब तक थिरकता रहता हूँ तेरे प्यार के घेरे में।
अजीब है मेरी कहानी, उससे भी अजीब है प्यार करके ना दर्शाने का तेरा तरीका।
जोर चला है मेरा सबपे, अभी तक ना डाल पाया हूँ डोरे तुझपे।
कृपा करना तू मुझपे बहुत, कृपा के ना फँसना प्यार में मेंरे, फँसाऊँगा प्यार के जोर से तुझे।


- डॉ.संतोष सिंह