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Hymn No. 1690 | Date: 26-Apr-2000
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प्यार करना चाहता हूँ बनके तेरे दिल की धड़कन।
प्यार करना चाहता हूँ बनके तेरे दिल की धड़कन।
उतर जाना चाहता हूँ श्वासों में तेरे हवा की तरह।
तेरा होके जाने के वास्ते आमूलचूल बदल जाना चाहता हूँ।
हँसने का पात्र हूँ तो, हँसाना चाहता हूँ तुझे भीतर से।
अहित होता हो जिससे तेरा, समेट लेना चाहे दामन में अपने।
अपने सुखमय ख्वाबों को आग लगा देना चाहूँ, तेरी सरत देखने के वास्ते।
तेरी और बढ़ते हुये हर दर्द को समेट लूँ सीने में अपने।
जान जाती है तो जाने दे, सह जाऊँगा तेरी कृपा से।
दया न करना तू मेरे वास्ते, हो सके तड़पाना खूब प्यार में तेरे।
निखरूँगा अनमोल प्यार की आग में तपके, तेरे श्री चरणों के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह