VIEW HYMN

Hymn No. 1692 | Date: 26-Apr-2000
Text Size
कोई गीत निकले ऐसा, दिल की अतुल गहराइयों से।
कोई गीत निकले ऐसा, दिल की अतुल गहराइयों से।
जो तेरे अनछुये दिल को छू ले बनके प्यार की तरंग।
विकल उठे मन तेरा मिलने को मिलके न आये चैन तुझे।
गूँज से उसकी बदल जाये सारा समा, हो जाये माहौल खुशनुमा।
मस्ती की तरंग उठे, घर कर जाये हर प्रेमियों के दिल में।
मिट जाये सारे भेद तन – मन के, रह न जाये कुछ प्यार के सिवाय।
हार – जीत से परे डूबा रहे दिल शाश्वत् प्यार में तेरे।
हर मौसम में आनंद की बरसात हो, ना कोई और बात हो।
गुरेज ना हो किसी बात से, अवकाश ना मिले प्यार से।
मिटता है अस्तित्व प्यार में तेरे, तो ना हो भान क्षण भर का।
अंतिम पंक्ति जन्मते ढल जाये प्यार के बूंदों में, प्यार के दरिया में समा जाने के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह