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Hymn No. 1730 | Date: 06-May-2000
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कसम है तुझे मेरे प्यार की, जो किया है तुझसे।
कसम है तुझे मेरे प्यार की, जो किया है तुझसे।
गँवारा ना है मेरे दिल को, कुछ और बतौर तेरे।
सँवारा हें न जाने कितनी बार, अपने पलको की छाँव में रखके।
कैसे भुला दूँ उन क्षणों को, जो बेसुध होके, गुजारा तेरे गीतों में।
जीते जी पाया है मैंने तुझे, खोना चाहूँ तेरी गोद में सर रखके।
मजबूर है सब कुछ बेरहम, तेरे प्यार के वास्ते।
जो तय ना कर सका था, वो तय कर लिया तेरे साथ रहके।
कहना ना रह गया कुछ, करना ही करना रह गया।
तेरे नाम के दम पे कर गुजर जायेंगे तेरा कहा हुआ।
लौटा नहीं सकता बढ़ें हुये कदमों को, दम लेंगे हम पहुँचके।


- डॉ.संतोष सिंह