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Hymn No. 1729 | Date: 06-May-2000
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मन मयूर बनके नाच रहा है, प्रियतम तेरे आँगन में।
मन मयूर बनके नाच रहा है, प्रियतम तेरे आँगन में।
छा जाता है जुनून दिल पे, जब पड़ जाती है इक् नजर तेरी।
दुःखों की गाज हो जात है बेअसर, रहबर तेरे अदा के आगे।
क्या बताऊँ क्या ना होता है साथ मेरे, बस होता है आलम मस्ती का।
कोई सोच नहीं सकता, तरन्नुम में चूमता हूँ परमपिता के लंबों को।
सच जब जाना, आँख होते हुये था अंधा अब तक मैं।
मानोगे मेरी बात, तो सच है खुदा से मिलने में ना है कोई परेशानी।
पानी का बूलबूला फूटके हो जाता है पानी, होता है हाल सबका एक दिन।
मतवालों के आगे चलती ना उसकी, बरबस हो जाता है शिकार प्यार का।
ऐसी कोई चीज ना है जहाँ में जो करा सके अहसास जुदाई का।


- डॉ.संतोष सिंह