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Hymn No. 1728 | Date: 04-May-2000
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अब पछताय होत क्या जब चुग गयी चिड़ियाँ सारा खेत।
अब पछताय होत क्या जब चुग गयी चिड़ियाँ सारा खेत।
रोने का ना है कोई मतलब, जब माना ना तेरा कहना।
समय रहते कर न पाया, कर न पाने का बहाना अनेक बनाया।
दिल में जो बात उतर गयी, तो कुछ भी हो भुलाये ना भूलती।
इक बार जो ठान लिया, हो जाये कुछ करके ही दिल मानता।
लाख समझाया अपने मन को, फिर भी ना मन ने साथ निभाया।
प्रभु ये सच है तेरे सिवाय जीवन में अपना भी काम न आया।
दाँव पे हमने क्या - क्या न लगाया, अभी तक मात ही हाथ आया।
बहुत खेला अब तक साथ मेंरे भाग्य प्रारब्ध ने, अब ना छू सकूँगा कोई।
रहके पास तेंरे गुरूवर दूर था मैं तुझसे, अब तो शरण में हूँ आया।


- डॉ.संतोष सिंह