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Hymn No. 1732 | Date: 07-May-2000
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हँस लो, हँस लो जी भरके मुझपे, हँस लो ऐ दुनियावालों।
हँस लो, हँस लो जी भरके मुझपे, हँस लो ऐ दुनियावालों।
तुम्हारे हँसने में ना है कोई अतिश्योक्ति मेरे वास्ते।
तुम्हारा हँसना कर जायेगा दृढ़, मुझको प्रभु का कहा करने वास्ते।
अभी तक भटका था कई बार, पिता के बताये हुये राह पे।
हर किमत चुकायेगे, उस राह पे चलने के वास्ते।
वैसे भी मिटा था कई बार, इस बार मिटेंगे उसके वास्ते।
मुक्कदर में जो मंजूर है फूल और काँटे, मुस्कुराये हर पल।
खुशी और दर्द छोड़ेंगे छाप चित्र में, प्यार तुझे याद दिलाके।
मतवाला मनायेगा मौज, हर बार पाला पड़ेगा अनबूझता से।
रब अब तो कर चुका हूँ अपने आपको तेरे हवाले, चलेगा ना जोर मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह