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Hymn No. 1762 | Date: 19-May-2000
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गुलशन में फूल खिले कई बार, पर दिल को चैन न आया।
गुलशन में फूल खिले कई बार, पर दिल को चैन न आया।
देखा हमने हजारो वादियाँ, पर मन को ना लुभा पाया कोई।
तरसते होंगे लोग जाने को जन्नत में, हम तो आनंद में हें हर कोने में।
इक् बार तो पूछके देख, कैसे मिलेगा तसव्वूर मिलेगा अंतरआत्मा को।
कहूँ – करूँ भी कुछ मन न माने, जब तक तुझे न पाऊँ पास अपने।
झूठी होगी बंदगी मेरी, पर तड़पना मेरा सच्चा है तेरे वास्ते।
आज रंज होगा तुझे हमारी कोई बात को लेके।
सनम करुँगा तेरा भी हाल – बेहाल प्यार से अपने।
मेरा जो कुछ भी होना है होगा हाथों से तेरे।
कबूल करुँगा हंसते हुये जो मिली मौत गर् हाथों से तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह