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Hymn No. 1763 | Date: 19-May-2000
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मुश्किल है अब बचाना, दामन तेरा हमारे हाथों से।
मुश्किल है अब बचाना, दामन तेरा हमारे हाथों से।
छुप जायेंगे ऐसा न खोज पायेगा तू चाहे कितना भी।
दामन से लिपटके नजरों से होके जायेंगे तेरे दिल तक।
मिटाना होगा मुश्किल, धड़केंगे वहाँ पे प्यार की धड़कन बनके।
अजब दास्ताँ होगी हमारे प्यार की, होगा दिवाना हर सुनने वाला।
गुँजूंगा वादियों में पवन की मौजों पर अमिट संगीत बनके।
हर कन् – मन झूमेगा जो मिट जायेंगा भेद चैतन्य – अचैतन्य का।
अपनी सीमा तोड़के बेताब हो उठेंगा हर कोई मिलने से तुझसे।
शामत आयेगी सबकी, कहेगा हर कोई आ गयी कयामत।
मस्ती का ये आलम होगा, हर दिल होगा बेहाल।


- डॉ.संतोष सिंह