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Hymn No. 1764 | Date: 20-May-2000
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करनी है यात्रा तेरी ओर सतत, करना पड़ेगा चाहे कितना भी अथक प्रयास।
करनी है यात्रा तेरी ओर सतत, करना पड़ेगा चाहे कितना भी अथक प्रयास।
साकार तुझे करने के वास्ते, हर ओर से जगाना होगा जोर अपने ऊपर।
सब कुछ सहजता – सरलता से होता है, बस साधना पड़ता है अपने आपको।
क्या नहीं समाया, जिसने कमाया तेरा नाम उसमे है तू समाया।
जमी – जमाया सदा से लूटतें रहा, सामर्थ्यवान के वास्ते शून्य है सब कुछ।
तू चाहे तो कर सकता है सब कुछ, लेके परम का आशीर्वाद।
हमारे सर पे हाथ रहता है हमेशा से, हमी हो जाते है बेसुध माया में।
ऐसा ना है सब कुछ शक्य था प्राचीन में, अर्वाचीन में होता आया सब कुछ।
आयेंगा जीवन में कैसा भी क्षण निराशा के, छोडुँगा साथ तेरा।
उसके चाहने से परे तू चाहना उसको, देखना रह न पायेगा तेरे बिना वो।


- डॉ.संतोष सिंह