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Hymn No. 1765 | Date: 20-May-2000
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सतत् एक ही बात कहता हूँ निकलेगा घोर निकम्में में से पुरूषार्थी।
सतत् एक ही बात कहता हूँ निकलेगा घोर निकम्में में से पुरूषार्थी।
मैं ना किसी ऐरे – गैरे के जिम्मे हूँ, मैं तो हूँ तेरे सहारे परम् पिता।
जो आज कर ना पा रहा है, वो कर दिखाऊँगा तेरी परम कृपा से।
मेरा धरम बन चुका है तेरा कहा हुआ करना, चाहे दम को पड़े तोड़का।
मत देख तू मेरे भूत को, अभूत बन जाऊँगा प्यार में तेरे सहारे।
अनिश्चिताओं से भरा लगता होगा मैं, पर दुखाऊँगा तेरे दिल को अब।
कीचड़ रूपी संसार में रहके खिलूंगा प्यार पाके तेरा कमल के समान।
रमेगा ना अब दिल में कोई, वो तो रम चूका है अब रब तुझमे।
कब क्या होगा कोई चिता नहीं, समा लो पागल हूँ मैं संसर में सबसे बड़ा।
घड़ा जीवन का जब फूटेगा, परम् पिता मौंज मनाऊँगा सबसे जियादा।


- डॉ.संतोष सिंह