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My Divine Blessing
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Hymn No. 1766 | Date: 20-May-2000
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सजनवा बेरी मन ने कर ली अब प्रीत तुझसे।
सजनवा बेरी मन ने कर ली अब प्रीत तुझसे।
जो भागता था इधर उधर रहता है अब चरणों में तेरे।
सुनी – सुनायी न कहता हूँ, अपने दिल की रौ में बहता हूँ।
आहत न होता कुछ से, जो रहता हूँ यार के ख्यालों में खोया।
जो ना सोचा था होने लगा, ज्यों – ज्यों रंगने लगा तेरे प्यार में।
क्या जलायेंगी दुनिया, मैं तो मारा हूँ यार के प्यार का।
शरारत बढती जा रही है, जैसे – जैसे गहराता जा रहा है दिल में प्यार तेरा।
हाथो से निकल चुका, रह न गया अब कुछ तुझसे ढका हुआ।
डूबा रहता है दिल प्यार में, डब – डबाके बह उठते है निर्झर झरने नयनो से।
मरने –जीने में है आनंद, पहुँचा दे प्यार में जिस मुकाम पे तू।
- डॉ.संतोष सिंह
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सतत् एक ही बात कहता हूँ निकलेगा घोर निकम्में में से पुरूषार्थी।
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न भूख रह गयी न प्यास, हुआ दिल में जब से तेरा वास।
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