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Hymn No. 1767 | Date: 21-May-2000
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न भूख रह गयी न प्यास, हुआ दिल में जब से तेरा वास।
न भूख रह गयी न प्यास, हुआ दिल में जब से तेरा वास।
अच्छे – बुरे मिट गये सार विचार, जब से खोया ख्यालों में मन तेरे।
पाने न पाने की इच्छा ना मन में अब सताती, तड़पता हूँ हाँ तेरे वास्ते।
गुरूर न है किसी बात का, तेरे प्यार के सुरूर को कह लें गुरूर तो है मंजूर।
जागने – सोने का रह ना गया कोई मतलब, हर बात का मतलब है तू।
कब क्या कर बैठूं न है पता मुझे, फरक पड़के ना पड़ता है किसी सजा से।
रहता है दिल खुश सदा, कैसें बताऊँ तेरी बंदगी बन गयी है जिंदगी।
अपना – पराया व्यवहार में, इन सबसे परें तेरा प्रेम और ज्ञान है।
भूले रहता हूँ इसमें अपना भान, समझ लो शान है ये मेरी।
मान ना करो मेरा, अपमान करके ना कर पाओगें अपमान मेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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