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Hymn No. 1768 | Date: 21-May-2000
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तलाश मेरी खत्म हो गयी, जो मुलाकात हो गयी तुझसे।
तलाश मेरी खत्म हो गयी, जो मुलाकात हो गयी तुझसे।
करनी है खत्म जिंदगी, मिलने के बाद तेरी होने के वास्ते।
अब तक भटकता था, मिल गया शुरूआत करने के वास्ते।
तुझे पाने का राज जान गया, करना होगा प्रयास सतत।
अंन्ततः होगा दीदार तेरा, कितना भी पा-सके तू रहना दूर मुझसे।
लगा दूँगा ढेर तेरे चरणों में यत्नों का, मिट जायेगी तेरी शर्म।
माना तूने ओढ रखा है धर्म का घूंघट, रिझायेंगे प्यार से।
कितना भी बचने का करेगा तू प्रयास, आयेंगे ज्ञान से पास में।
जानेगा तेरा कहाँ करने के वास्ते, जान देके कर दिखायेंगे।
सच पूछो तो ना है कुछ वश में, ये तो तेरी कृपा का है असर।


- डॉ.संतोष सिंह