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Hymn No. 1769 | Date: 21-May-2000
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है प्रभो मिलते रहने देना इन निगाहों को निगाहों से।
है प्रभो मिलते रहने देना इन निगाहों को निगाहों से।
दिल ही दिल में बातों का सिलसिला अनवरत चलते रहने देना।
मत लगाना रोक हमारे मन पे, कर लेने देना मनमानी संग तेरे।
अंग – अंग को रंग जाने देना, प्रियतम् तेरे प्यार के रंग में।
रखना हमारे ऊपर कोई रोक न टोक, विचरू उन्मुक्त होके तेरे संग।
जब चाहूँ करूँ दीदार तेरा, कहीं भी सूर झूका के।
शुरू हुआ है जो दौर प्यार का, होने न देना खत्म कभी तू।
बावरे की हालत पे न खानां तरस, पूरा का पुरा बनाके छोड़ना बावरा।
छूटता है तन से प्राण तो कोई गम नहीं, पहुचानाँ पर पास तेरे।
तुझसे अलग न है कुछ मंजूर, अड़े आये मेरा में निशंक होके कर देना खात्मा तू।


- डॉ.संतोष सिंह