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Hymn No. 1775 | Date: 24-May-2000
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बहाना ना करता हूँ, पर कुछ अजीब सा होता है साथ मेरे।
बहाना ना करता हूँ, पर कुछ अजीब सा होता है साथ मेरे।
जब यादें सताती है तेरी, तब रहता हूँ मैं भीड़ के साथ।
आता है तब प्यार बहुत तुझपे, हो जाता है हाल बुरा लोगों के बीच।
करना चाहता हूँ इजहार, पर रुक जाता हूँ नजर पड़ते ओरों पे।
कसूर क्या है मेरा बता दें तू, क्या प्यार करने का सहूर अब तक न आया।
जो बात दिल में रहती है उसे भी ठीक से कहना न आया तुझसे।
ख्याल तो बहुत से आते है लेके तुझे पर बात बनती नहीं एक भी।
सब कुछ ठीक ठाक है चलता अचानक कर बैठता हूँ तभी कोई न कोई चुक।
कई बार समझाया अपने आपको पर मन को वहीं का वहीं खड़ा पाया।
इक् बार लगा दे हाक कट जाये मेरी नाथ, दौड़ पडू बेतहाशा और तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह