My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1872 | Date: 17-Jul-2000
Text Size
गुरू तू तो है गुरू, आलोक प्रकटे तेरा नाम लेते ही मन में।
गुरू तू तो है गुरू, आलोक प्रकटे तेरा नाम लेते ही मन में।
बयाँ करना नहीं आसान, मेरे जैसे क्षुद्र बिसात वाले के वास्ते।
वो तो है तेरी कृपा, जो ले लेने देता है तेरा नाम हमको।
परम पिता तो वास करते है संसार में, पर प्रकटने के वास्ते रूप धरें तेरा।
इनायत बरसाये तू सदा इक् सी, हम जैसे दोजख में पड़े हुओं पे।
आज जो कुछ भी हूँ तेरे कारण, नहीं तो कहीं का न था मैं।
सहीं या गलत नहीं जानता हूँ, पर मेरे राह का अंतिम पड़ाव है तू।
हम तरसते हुओं के वास्ते रेगिस्तान में तू है नखलिस्तान।
कंपकंपा जाती है रूह सोचकें, अगर तू न मिलता तो क्या होता हाल हमारा।
इस जेल से निकलके भटकता नित्य – नये – नये जेल में।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
कैसे करूं मैं और प्यार तुझसे, यार समझ में न आये मुझको।
Next
हमको कहना न आया अब तक तुझसे।
*
*