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Hymn No. 1871 | Date: 16-Jul-2000
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कैसे करूं मैं और प्यार तुझसे, यार समझ में न आये मुझको।
कैसे करूं मैं और प्यार तुझसे, यार समझ में न आये मुझको।
मुझे ना है कोई और को दिखाना, दिल को जताना है प्यार तुझसे।
भरता नहीं दम तेरी दिवानगी का, परवाना चढ़ रहा है प्यार तेरा।
मरना – जीना सब कुछ है कबूल, तेरे वास्ते सब कुछ है कबूल।
जिद्द ना करता किसी बात की, मैं लायक ही नहीं तेरे प्यार के।
यार करता हूँ उनको सलाम, जो करते है तुझसे बहुत प्यार।
यार करता हूँ उनको बहुत सलाम जिनसे तू करता है बहुत प्यार।
जानता हूँ जो तोड़ते है हदों को, तू उनको भी करता है बहुत प्यार।
तेरे दरबार का सबसे अदना जीव हूँ, जो पुकारें तुझे होके निर्जीव।
इस ना की ना देख तू लायक, तेरा प्यार बना जायेगा मेरे रोम – रोम को तेरे लायक।


- डॉ.संतोष सिंह