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Hymn No. 1930 | Date: 10-Aug-2000
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पुकार मची है दिल में लेके तुझे, तेरा कहना ठीक है पर मंजूर न है हमको।
पुकार मची है दिल में लेके तुझे, तेरा कहना ठीक है पर मंजूर न है हमको।
एतबार बहुत है तुझपे पर ऐतराब है तुझसे, तेरा कहना करता नहीं गंवारा है कोई चारों हमकों।
तेरे नजदीक रहना लगता है अच्छा हमको, पर चले जाते है दूर करके कर्म कुंछ हम।
जानम कब तक चलता रहेगा खेल ऐ तेरा, अजीज आके नहीं प्यार से आना चाहते है हम।
दम हो या ना हो हमारी बातों में, मन मचलता रहता है हर पल तेरे बगैर।
सकून जाता रहा है दिल का, कितना भी खिलखिलाऊँ छायी रहती है उदासी भीतर अजीब सी।
शिकवा है ना कोई तुझसे, पर प्यार में मेरे न है जोर इतना हो जाये तू मजबूर।
पास आया तेरे न जाने कितनी बार, पर दूरी बनी हुयी है तेरे मेरे बीच की ज्यों की त्यों।
माना खेल ना है बच्चों का, पर हम इक बार नहीं सौ बार कटाना चाहेगे सर कदमों में तेरे।
देर न जाने किस और से हों रही है, तू कर दे आज खत्म हमारे बीच की दूरी को।
- डॉ.संतोष सिंह
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दम नहीं है हममें इतना, लड़ - झगड़ के आ जाऊँ पास तेरे।
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है। गोंसाई तू जाने मनवा की हर बार को, तो क्यों ना हर मेरे भीतर के संताप को।
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