VIEW HYMN

Hymn No. 1932 | Date: 11-Aug-2000
Text Size
ऐसा क्या किया था हमने जो पीनी पड़ रहीं है विरह की घूंट।
ऐसा क्या किया था हमने जो पीनी पड़ रहीं है विरह की घूंट।
तुझे याद अगर ना है वो तो प्रिय, तूने क्यूँ याद रखा है उसे।
हमें तो तू कहता है सब कुछ भूल जाने के लिये, तो क्यों तूने याद रखा।
अगर ऐसा ना है तो दिल के बीच की दूरी मिटी नहीं अब तक क्यों।
मैं तो रोम – रोम को कर देना चाहता हूँ तरबतर तेरे प्यार से।
क्या मेरे आँसुओं में न है इतनी ताकत, कर दे मजबूर तुझे प्यार करने के वास्ते।
इश्क न है मुझे किसी और से है तो खुद से, मेरे अश्क – अश्क न होके है जो सारे पानी की बूंद।
उनमें न है ताकत जो सीच सके बरसो पुराने प्यार को, कर दो मजबूर यार को।
पहले न जाना था, अब जाके जाना हूँ मैं कितना गलत पड़ा हूँ होके तुझसे अलग।
सलाम करते है तेरे प्यार को, अब गुम हो जाने दे गमों के अंतहीन सैलाब में।


- डॉ.संतोष सिंह