My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1978 | Date: 12-Sep-2000
Text Size
धरा पे हर इक् का अस्तित्व है अलग अलग, मालिक है अपनी मर्जी का सब कोई।
धरा पे हर इक् का अस्तित्व है अलग अलग, मालिक है अपनी मर्जी का सब कोई।
सबसे बड़ा जुल्म है किसी का मर्जी पे अपनी मर्जी लादना, चाहे हो वो कोई अदना सा व्यक्ति
अगर किसीको न हंसा सकते है, तो किसीको रुलाना जुर्म है सबसे बड़ा।
अगर किसीको न कूछ दे सकते हें तो किसीका छीनना घिनौना पाप है सबसे बड़ा।
अगर किसीको न प्यार कर सकते है दमन करना है अत्याचार।
अगर किसीको के जख्मो को ठीक कर सकते है, तो किसीके जख्मो को कुरेदना धूर्तता है।
अगर किसीको शरण दे सकते है, तो किसीको आश्रयहीन करना काम हे आतातायी का।
अगर किसीको मदत कर सकते है तो किसीकी मदद छिनना सबसे बड़ी खुदगर्जी है।
अगर किसीको न सात्वना दे सकते है तो किसीसे कटुता बोलने का ना कोई हक है।
अगर किसीको न सुन सकते है तो हम जो कहे ऐसा वो माने सोचना है गलत।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
इक् इक् कदम पे बढता जा रहा है जोर प्यार का।
Next
मुझसे जीयारा है कौन हिंदू, मुझसे सच्चा ना कोई मुसलमां।
*
*