VIEW HYMN

Hymn No. 2038 | Date: 16-Oct-2000
Text Size
मचलते हुये दिल से छलकता जा रहा है जाम प्रभु तेरे नाम का।
मचलते हुये दिल से छलकता जा रहा है जाम प्रभु तेरे नाम का।

दिया जिसने यादों का दाम, मिला उसको पीने का मौका सुबहो शाम।

ख्वाबों से उतरके ख्ययालों में वो आया, जो बात हो नही पाती थी हो गयी वो दिल में।

एक एक करके खुलता चला गया, राज प्यार में उसके जो सब कुछ भूलता चला गया।

मेहरबानी ही तो है जो इस नक्कारे की भी करता है कद्र अपना प्यार देके।

देखा नही था हमने भी उसके जैसा हरफन मौला, जो कर दे हर काम को प्यार से।

बातें, विचार और वर्तन सब एक हो जाते है, जब वो आ जाता है सामने।

प्यार के सिवाय कुछ न वो बताता, प्यार के सहारे सिखाता करना हर इक काम को।

देने से दाम जो न मिलता है दे देता है वो प्यार के नाम से।

बूझ सकोगे ना, बूझने से परे मिलता है प्यार में अंजाम जो।


- डॉ.संतोष सिंह