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My Divine Blessing
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Hymn No. 2039 | Date: 17-Oct-2000
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बहुत कुछ तुझसे कहना है, बहुत कुछ तुझसे सुनना है।
बहुत कुछ तुझसे कहना है, बहुत कुछ तुझसे सुनना है।
भरता नही दिल दे दे तू मौका चाहे कितना भी मिलने का।
माना जानता है तू सब कुछ, फिर भी कहना चाहता हूँ सब कुछ।
रब कही भी रहूँ मैं, दौड़ता है दिल मेरा हर पल तेरी और।
भरमाता है मनु, न जाने कब लगाती है आग इच्छाये तन में।
दंग रह जाता हूँ अपने किये को देखके, फिर भी जी उठता हूँ नाम लेके तेरा।
सकून मिलता है तेरे पास आने पे, तिर उठता है रोम – रोम मेरा आनंद में।
कब तक रब चलेगा खेल तेरा मिलके बिछुड़ने का हमारे संग।
अब तो रंग दे तेरे प्यार के रंग में, खत्म हो जाये भेद सारा।
सारी जीवन के दुश्चिताओं को लांघ के, सुगम बन जाऊँ प्यार में तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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मचलते हुये दिल से छलकता जा रहा है जाम प्रभु तेरे नाम का।
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मिलते ही तुझसे खिल जाता हूँ, तुझसे दूर रहने पे रहता नहीं आपे में।
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