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Hymn No. 207 | Date: 13-Jul-1998
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काका मेरे काका तुझसे ही मेरी फरियाद है, युँ ही तुझको याद करने का एक बहाना है ।
काका मेरे काका तुझसे ही मेरी फरियाद है, युँ ही तुझको याद करने का एक बहाना है ।
तेरे पास आने के ये सब नये – नये अफसाने है, फसाना ये मेरा पुराना है।
तेरा दीवाना हूँ माफ करना मुझको, नहीं है पता रीत – रिवाज प्रेमियों का;
मेरे मन को जब याद आ जाती है तेरी, तो हो जाता है बेचैन ।
तेरी यादों को मन में संजोने के चक्कर में हो जाती है उससे भूल
चाहता हूँ दे दे तेरे चरणों की धूल, रख लूँ अपने दिल में सदा के लिये ।
उससे खिले तेरे प्यार का फूल, जो ना मुझे किसी पल तूझे भूलने दे,
उसकी प्यार भरी महक में, मैं हर पल तुझमें डूबा रहूँगा ।
काँटो की पीड़ा अहसास करायेगी, तेरे मेरे बीच की दूरी को;
उसकी सुंदरता को देखके मे हर पल याद करता रहूँगा तुझको ।


- डॉ.संतोष सिंह