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Hymn No. 206 | Date: 13-Jul-1998
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कृपा है, कृपा है तेरी ही कृपा है, मगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये;
कृपा है, कृपा है तेरी ही कृपा है, मगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये;
एक छोटी सी चिंगारी को बदल देता है तू आग में,
एक कण से तू बनाता है सारे नक्षत्र – तारे ब्रह्माण्ड के;
कृपा है, कृपा है तेरी ही कृपा है, अगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये।
जिसने पायी तेरी कृपा उसके आगे हर कोई झुका;
एक बूँद से भर जाता है सागर, तेरे प्रेम की एक बूँद चखके, कितनों ने रच डाली रामायण – महाभारत ।
कृपा है, कृपा है, तेरी कृपा है अगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये ।
नश्वर जगत का पत्ता भी हिलता है तेरी कृपा से;
चाँद और सूरज चलते है दिन - रात; अनंत काल से तेरी कृपा है,
कृपा है, कृपा है, तेरी कृपा है, अगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये;
तेरी कृपा से जिन दिलों में इक् बार जली प्रेम की ज्योत
हर आँधी – तूफां के थपेडों को सहके बन जाती है अखंड ज्योत;
कृपा है, कृपा है, तेरी ही कृपा है; अगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये।
मन में उत्साह जगाती है तेरी कृपा, दिल में उमंग भर जाती है तेरी कृपा से,
तेरी कृपा से तर जाते है हम, जैसे कितने अभागे, जो रहते है दुनिया से भागे,
कृपा है, कृपा है, तेरी कृपा है; अगर तेरी कृपा है तो क्या न हो जाये ।


- डॉ.संतोष सिंह