VIEW HYMN

Hymn No. 205 | Date: 12-Jul-1998
Text Size
तुझसे कम में कुछ नहीं माँगूँगा, तुझसे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए;
तुझसे कम में कुछ नहीं माँगूँगा, तुझसे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए;
मुझको तो बस इक् तू ही चाहिए, तेरे आगे सब ऐश्वर्य है राख के समान।
तेरे नाम के सहारे चलती है साँस मेरी, कुर्बान हो गया हूँ मैं तुझपे,
इस नश्वर जगत में क्या है पाना, कुछ देना है, तो दे दे तेरी दासता ।
तुझे हर पल स्वीकार करते है, और तो और मन के करीब पाते है
जताते है तुझसे अपने प्यार को, पर तू अहसास करके इतना शांत क्यों रहता है ।
कोई और क्या दे देगा मुझको, तू सजा भी देगा तो कबूल है;
कई बार मिट चुका हूँ इस जगत में, इस बार तेरे चरणों में मिटने दे ।
मिट के भी ना मिट पायेंगे, तेरे दर पे जो शरण पायेंगे;
जो जी के भी ना मिला था, वो मिट के मिल जायेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह