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Hymn No. 2199 | Date: 01-Mar-2001
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अजीब दास्तां हें प्रेमियों की, तड़पते है तिल तिल फिर भी करते है प्यार यार को।
अजीब दास्तां हें प्रेमियों की, तड़पते है तिल तिल फिर भी करते है प्यार यार को।
दाग लगते है न जाने कितने दामन पे, फिर भी बावरे होके फिरते है प्यार के पीछे।
नासमझी कहो या समझ, कुछ न समझना चाहते यार के प्यार के पीछे।
चढ़के जब बोलता है प्यार, जहालत दुनिया भर की सहते हुये करते है प्यार।
कसूरवार तो होते है बहुतों के, पर बदल देते है प्यार से सबकी मौजूदगी को न मौजगी में।
जग हंसाई के पात्र बन जाते है, फिर भी फिरते है बिसुरते अपने प्यार के पीछे पीछे ।
लगी है लत छूटती नहीं, यार के प्यार के सिवाय आस कोई रखते नहीं।
न जाने कितने छींटे उड़तें है तानाकसी के फिर भी रखते नहीं कोई मलाल दिल में।
सिसक पड़ते है यार का कुछ कहाँ हुआ याद आते ही, जब गिनती करता है यार बेवफाओ में।
फिर भी देते हुये दुआये लाखों यार को, सलामत रहना तू सदा लुटाना प्यार किसी सच्चे दिलदार पे।
- डॉ.संतोष सिंह
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मेरी कोई औकात नहीं प्यार की दुनिया में, जहाँ होते है एक से बढ़के एक परवाने।
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महफिल में बैठा है यारों का यार, निरखते हुये बरसाये प्यार नजरों से।
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