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Hymn No. 2258 | Date: 13-Apr-2001
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गुले गुलशन में फूल खिलते है हजारों, परवानगी को चढते है दो चार।
गुले गुलशन में फूल खिलते है हजारों, परवानगी को चढते है दो चार।
प्यार तो हर कोई करता है जमाने में, मुफलिस कोई एक ही पाता है पैमाने को।
यहाँ गुजरती है रात आँखो में साया भी साथ छोड़ जाता है सताने पे।
फिर भी शिकवों को लेते नही नाम, तसव्वूर पाते है यार के हाथों सताने में।
गुंजते है बनके मोहब्बत की दास्ताँ, दिल वालों के लिये दे जाते है पैगाम प्यार का।
यारों ये न कोई सौदा है पाने का, मिटना पड़ता है प्यार होने के लिये।
कहना चाहते है बहुत कुछ, पर हो जाते है लाजवाब यार से नजर मिलते ही।
दिल मसोस के रह जाते है, विरह के गीतों में खोजते है यार के प्यार को।
खाकसार खाक होने पे सुकुन पाते है, पाने से ज्यादा रहता है विश्वास जो मिटने में।
चलता रहता है दौर मोहब्बत का, बिना शोर के हर अंदाज बया करते है।
- डॉ.संतोष सिंह
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