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Hymn No. 2269 | Date: 19-Apr-2001
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रच बुन रहा हूँ अपने प्यार के संसार को अपने ख्यालों में।
रच बुन रहा हूँ अपने प्यार के संसार को अपने ख्यालों में।
पर वहाँ भी रखता हूँ ख्याल कहीं दर्द ना दे जाऊँ यार को अनजाने में।
करता हूँ प्यार भरी बात, देखे हुये ख्वाबों में रंग भरने के वास्ते।
रहता हूँ इस इंतजार में मिले मौका कब उड़न छूं हो जाऊँ तेरे संग।
आँखो ही आँखों में गुजरते है पल, नामुमकिन को मुमकिन करते हुये।
वहाँ पे अपने दिल का हूँ राजा, जो चाहता हूँ वो करता हूँ संग उसके।
ना रहती है कि बात कि फिकर, ना ही मन में कोई मलाल, चाहे जिंदगी में झंझट हो हजार।
सुनी सुनी आँखों से बुनता हूँ प्यार की मनचाही कहानी।
सच तो ये है खुद को जब करीब उसके नहीं पाता, तो बुनता हूँ ख्यालों को।
बह उठते है जब अश्क पखारते हुये मेरे मन को जब अस्पष्ट स्वरों में गुनगुनांता है वो गीत दिल में।
- डॉ.संतोष सिंह
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बरसती है तेरी कृपा अनुपम हर पल, धड़क उठता है दिल धुनो पे तेरी।
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है। प्रेमीयों के प्रेमी चुराये दिल को तू पलक मलकते।
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