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Hymn No. 231 | Date: 25-Jul-1998
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क्या – क्या ध्यान रखेगा तू, कहीं न कहीं चूक जायेगा जरूर;
क्या – क्या ध्यान रखेगा तू, कहीं न कहीं चूक जायेगा जरूर;
ध्यान कर ले तू उसका हर पल बिन चूके ध्यान रखेगा वो तेरा ।
जान जा तू जरूर जो भी करता है, वही करता है ;
हम तो उसके हाथों की कठपुतलियाँ है, जैसा नचाये वैसा नाचना है ।
कर्ता एक वही, बाकी सब कुछ आभास मात्र है ;
नींद खुलेगी तेरी जब, अपने सपनों पे रोयेंगा तू जरूर।
तेरा नीति – नियंता वो है, आज नहीं कल उसके अनुरूप ढलना पड़ेगा जरूर,
देर- – सवेर करके क्या फायदा, जीना शुरू कर दे तू उसके संग ।
ना घबराना तू कभी, आये चाहे तुझपे कोई संकट, मन में उसको तू सदा बसाना;
तेरी इस अदा पे जो दूर था वो खींचा चला आयेगा ।
तब बांध लेना उसको प्यार के बंधन में, आँसूओं की हथकडी तू पहना देना;
खुद ब खुद वो जुड जायेगा तुझसे, तेरा साथ कभी ना छोड़ेगा।


- डॉ.संतोष सिंह