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Hymn No. 2365 | Date: 21-Jun-2001
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अरे तरस गये हम तरस गये, तेरे रहते तेरे प्यार को हम तरस गये।
अरे तरस गये हम तरस गये, तेरे रहते तेरे प्यार को हम तरस गये।
बरपा ले तू कहर हमपे, पर बरपाना न कहर औरो पे।
अच्छी नहीं लगेगी तेरी चर्चा लोगों में, जो करेगे बदनाम प्यार के नाम पे झूठमूठ में।
माना न हम सच्चे है, ओर प्यार भी है झूठा, पर दिल न था कभी तुझसे रूठा।
हो सकता है, मेरे वश की बात नहीं तेरा प्यार पाना, पर तेरे वश में तो हूँ मैं।
खेल रहा है करम संग हमारे, तो दोष कैसे दूं तेरे प्यार को।
लेकिन ये तू जान ले भले जाने सब कुछ, मेरे दिल में छिपे प्यार को पहचान।
जरूरत होगी लाख बहुत कुछ की, पर जरूरत है सबसे ज्यादा तेरे प्यार की।
हजरत हमने कोई अलबेली किस्मत न पायी है न कोई बहुत बड़ी जहमत उठायी।
फिर भी आस नहीं खोंयी प्यार को पाने की, जो रहने वाली है श्वास के अंतिम ठौर तक।
- डॉ.संतोष सिंह
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