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Hymn No. 2381 | Date: 08-Jul-2001
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बताना चाहता हूँ हाल अपने दिल का, सुनाना चाहता हूँ बात अपने मन की।
बताना चाहता हूँ हाल अपने दिल का, सुनाना चाहता हूँ बात अपने मन की।
घायल हूँ तेरे प्यार का, मत छोड़ अधमरा करके, या तो मार दे या प्यार दे।
शिकवा न है कोई तुझसे, शिकवा तो है अपने आपकी लेके।
शब्द अब तक शब्द क्यों है, क्यों भेद ये सिर्फ मेरे दिल को।
सनम तौबा है हर उस चीज से, जो दूर ले जाये तुझको मुझसे।
हारना नहीं चाहता, पर हार जाना चाहता हूँ खुद को तेरे हाथों।
तड़प है अधुरी तो और बढ़ा दे, तड़पने का सुकुन तो दे दे दिल को।
तेरे साथ रहके रहता हूँ निपट अकेला, तो तेरा अहसास तो दे दे।
मत बना अब तू कास का दास मेरे दिल को, बना ले जो तेरा वास्ता
रहना चाहता हूँ होके चूर तेरे प्यार में, प्यार की दुनिया में रमके करुँगा कहाँ तेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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