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Hymn No. 2382 | Date: 08-Jul-2001
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प्यार प्यार की बातें करता हूँ हजार, पर प्यार करना न आया जी भरके।
प्यार प्यार की बातें करता हूँ हजार, पर प्यार करना न आया जी भरके।
प्यार करना चाहा तुझे जी भरके, पर अहसास प्यार का कराना न आया दिल को।
चस्पा नाम पे न जाने कितनी झूठी बातें, हंसके फिर भी तसदीक कर दी हमने।
दोष तो था हममें पर देता था प्यार का जोश तू भर भरके दिल में।
अब क्यों तू दूर करता जा रहा है, जब बारी आयी प्यार में चूर करने की।
सजा देना है तो दे देना कोई और, पास रखके मत रख तू तुझसे दूर।
एक एक पल पहाड सा बीतता है, तेरा कहा करना छोड़ यूँ ही दिन गुजरता है।
पथरा सी जाती है आँखे निहारते तुझको, जाने कौन से शब्द निकलते है बड़बड़ बनके
अगर तेरे दिल को आता है इसमें मजा, तो न करुँगा कभी और कोई शिकवा।
तेरे साथ रहके पकड़ना नहीं चाहता रुसवाई का दामन, रहना चाहता हूँ बनके तेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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बताना चाहता हूँ हाल अपने दिल का, सुनाना चाहता हूँ बात अपने मन की।
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है... अलबेला हूँ, प्यार की राहत पे अपने आप में अकेला हूँ।
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