VIEW HYMN

Hymn No. 2458 | Date: 27-Sep-2001
Text Size
तुमसे बहुत कुछ कहना है, पर पहले तेरी यादों में बसना है।
तुमसे बहुत कुछ कहना है, पर पहले तेरी यादों में बसना है।
कि कहाँ से करुँ शुरूआत, चिलमन उठ जाये पहली बार में।
जी चाहता है वो बात क्यों नहीं आती जुबां पे, क्या कोई कमी है वफा में।
भरता हूँ दम तेरे प्यार का, फिर क्यों नहीं होता मजबूर तू पास आने को।
बुने हुये ख्वाबों में रंग भरना चाहता हूँ प्रभु तेरे अनुपम प्यार के।
चिरकाल से संजोये हूँ इस बात को, कि बंध जाऊँ तेरे प्यार के बंधन में।
ये कैसी देर है जो बिताये ना बीते, हर घड़ी को इंतजार में बदलती जाये।
अहसास होते हुये भी क्यो नही अंजाम दे पा रहा हूँ अपने प्यार को।
मुश्किलात ऐसे आते रहेगे तो न जाने कितने तुझसे मूंह फेर लेंगे।
अपना तो क्या हर हाल में पहुँचेंगे अंजाम को कि जो तेरा हाथ है हाथों में।


- डॉ.संतोष सिंह