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Hymn No. 2457 | Date: 27-Sep-2001
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मेरे दुःखों पे तरस खाके न तू प्यार करना, न आँखे चार करना।
मेरे दुःखों पे तरस खाके न तू प्यार करना, न आँखे चार करना।
किया है प्यार कोई सौदा नही, कि खुश होके भी प्यार का इनाम न देना।
प्यार है दिल में तो हाथ थाम लेना, मेरी अच्छी बुरी बातों को न ईल्जाम देना।
प्यार किया है तुझसे तहे दिल से, उसे बंदगी जैसा कोई उपनाम न देना।
सरोकार मेरा सिर्फ तुझसे है, न तेरी खुदाई ओर बेंवफाई से।
अगर देना है तो दे दे, मेरे यादों में तू सुबहो शाम रहना।
जब चाहे तब ख्यालों में आना, जो तेरे दिल को लगे वो मुझसे बेंलाग कहना।
बेंवफाई हो या प्यार उसका इजहार तू सरेआम करना, मुझसे भी यही सरोकार रखना।
प्यार के सिवाय कुछ ओर का न नाम लेना, मेरे प्यार को हर पल नया आयाम देना।
काल से परे जन्मों जन्म के हर बंधन को तोड़के मेरे प्यार पे कभी विराम देना।
मेरे यार के खातिर हर कीमत पे मेरे ख्वाबों को तू प्यार से अपने साकार करना।


- डॉ.संतोष सिंह