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Hymn No. 2456 | Date: 27-Sep-2001
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बुन रहा हूँ दिन रात अपने ख्वाबों को, रंग भरना चाहता हूँ तेरे प्यार का उसमें।
बुन रहा हूँ दिन रात अपने ख्वाबों को, रंग भरना चाहता हूँ तेरे प्यार का उसमें।
सहेज के रखूंगा उस याद को अपने जेहन में, साकार करने के वास्ते गुजार दूंगा जिंदगी को।
बंदगी होगी प्यार करना उसको, मौका मिलने पे खुद को कुर्बान कर दूंगा तुझ पे।
तरन्नुम में खोके सुनाऊंगा नगमें प्यार के, चुपके चुपके छा जाऊंगा दिल पे उसके।
आज भले लगता हो नामुमकिन, पर कारवाँ प्यार का मेरे मजिल पे पहुँचके लेगा दम।
होश बिना खोये मदहोशी का गीत गाऊंगा, तुझे जीतने के वास्ते कोई कसर न छोडूंगा।
बयान करेगी प्यार को तेरे हालात मेरी, हालात में संजोता रहूँगा तेरे प्यार को।
नजर भरके देखने के वास्ते गुजार दूंगा जिंदगी, अपलक नजरों से करुँगा इंतजार तेरा।
गम से भरे पलों में भी खुशीयों का इजहार करुँगा, प्यार के सिवाय कोई बात न कहूंगा।
तेरी कितनी भी न हो तो क्या, उसे हाँ समझके स्वीकार करुँगा।


- डॉ.संतोष सिंह