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Hymn No. 2688 | Date: 30-Aug-2003
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झूम रहा हूँ न जाने किस बात पर, क्या मैं अनजान हूँ अपने आप से।
झूम रहा हूँ न जाने किस बात पर, क्या मैं अनजान हूँ अपने आप से।
सुखों ओर दुःखों पे ना निर्भर हो मेरा झूमना, मैं झूमता रहूँ तेरे प्यार की मस्ती मैं।
पाया ओर खोया का क्यों हो रोना, मेरे लिये झूमना ही तेरे प्यार के अहसास से।
अपनो का मिलना ओर बिछुड़ना है जीवन चक्र, उससे परे हो मेरा झूमना तेरे धून पे।
किसने क्या किया क्या न किया पर निर्भर न हो, हम तो झूमे तेरे प्यार की दीवानगी मैं।
सलूकी बदसलूकी से क्या लेना देना हमैं, परवाने बनके हमारा हो झूमना।
अपना है या पराया का ख्याल क्यों है करना, तेरी भक्ति मैं सर्वदा रहते हो झूमना।
जीना हो या मरना जिंदगी का कोई हो कोना, मुझे तुझमें रमते हुये हो झूमना।
किसी ने जाना या न जाना, नजरअंदाज रहके जीवन मैं हो झूमना तेरे प्यार मैं।
मन हो या दिल का कोई कोना, झूमना हो निरंतर प्रभु बस तेरे लिये।


- डॉ.संतोष सिंह