Hymn No. 2687 | Date: 30-Aug-2003
इनायत है तेरी, इनायत है तेरी, इनायत है तेरी, इनायत है तेरी।
इनायत है तेरी, इनायत है तेरी, इनायत है तेरी, इनायत है तेरी। किस मुख से करुँ शुक्रियाँ अदा, जो लगते हैं बेजान तेरी इनायत के आगे। जो न था किस्मत मैं मेरी, नवाजता है अपनी इनायत से, इनायत है तेरी। जो न मिला हमारे कर्मों के चलते, वो दिया इनायत से तूने अपने, इनायत... जहां न चली किसीकी, ना ही मेरी, वह कर दिखाया इनायत से तूने अपनी, इनायत... जाना न था जब, माना न था, उन पलों मैं भी बरसायी इनायत तूने, इनायत... किसी काबिल न था, किसी के काबिल न थे, ढलते गये इनायत से, इनायत... होश मैं न था, न ही जोश कुछ कर गुजर जाने का, करते गया इनायत से तेरे इनायत... होगा सबका किया हुँआ अपने दम पे, हमारा वजूद तो टिका है तेरी इनायत पे, इनायत... किसी भी चीज से हमको गूरेज न है, मेरी जिंदगी का दूसरा नाम है तेरी इनायत, इनायत...
- डॉ.संतोष सिंह
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