Hymn No. 2690 | Date: 07-Aug-2003
ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा, की गलियों से कर दिखाना है कहा तेरा।
ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा, की गलियों से कर दिखाना है कहा तेरा। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा, से भरे दौर मैं मुस्कराना है अपूर्व विश्वास से। ना रे ना ना रे हा, न हा, न हा, होता रहे कितना भी जिंदगी मैं अपराध बनके निकलना है इस दौर से। ना रे ना, ना रे ना, न हा, न हा, तो होता रहेगा उसके होने से परे हो जाना है हमको तेरा। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा, तो बदल देना है अपूर्व पुरूषार्थ से हां हां मैं सदा के वास्ते। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा, से हटके चलना है सदा के लिये विजय पथ पे। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा, को विराम दे देना है सदा के वास्ते। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा का कोई मतलब नही परम पथ पे। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा के अंदाज का क्या करना, जो हर अंदाज से परे हो जिंदगी के हालात। ना रे ना, ना रे हा, न हा, न हा से भरी दुनिया मैं न ना जैसा ना हो जैसा होना हो कुछ भी।
- डॉ.संतोष सिंह
|