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Hymn No. 2691 | Date: 10-Aug-2003
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तेरे पास रहके यूं ही रह न जायें हम।
तेरे पास रहके यूं ही रह न जायें हम।
पता ना चले खुदको चुपके से बदल जाये हम।
गवारा है सब कुछ, गवारा नही न होना तेरा।
संवारा है जो अब तक, तो संवार दे हर हमेशा के वास्ते।
तेरे सिवाय न जानी कोई ओर राह, न चाहा किसीको।
उम्र की इस दहलीज पे, जो हाथ छुड़ाये तो जायें कहाँ हम।
एक बार नहीं अनेको बार ठ्कठ्काऊँ तेरे दर को।
दरवाजा भले खुला हो, हाथ पकड़के आऊँगा अंदर।
जो आज तक कर न सका, तेरी कृपा से कर जाऊँगा।
हर श्वास पे तेरी कृपा के गीत, मस्ती से गाऊंगा।


- डॉ.संतोष सिंह