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Hymn No. 2692 | Date: 10-Sep-2003
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ये तो मोहब्बत है जहाँ अच्छे अच्छे होते है बदनाम।
ये तो मोहब्बत है जहाँ अच्छे अच्छे होते है बदनाम।
क्या करे जमाना जहाँ मजनू का हो प्यार के सिवाय न कोई ठिकाना।
रात हो या दिन, हर हाल मैं जुबां ओर दिल से निकले नाम यार का।
घायल होते नही वो, घायल करते हैं प्यार से वो अपनों को।
चलता है खेल जन्मों से, प्यार का रिश्ता अटूट जो रहता है।
कहता नहीं वो किसी से, हर पल साराबोर रहता है प्यार मैं।
गुरेंज न है उसको किसी से, खूंरेज नजरों से देखे जमाना कितना भी।
बन चुका है जीती जागती मिसाल, खुदा भी चुपचाप उसके दर्द को जो है।
उल्फत बरसे या प्यार उसको न नजर आये अपने प्यार के सिवाय कोई ओर।
सारी लकीर बनके मिट जाती है, रह जाती है प्यार की लकीर जिंदगी मैं।


- डॉ.संतोष सिंह