My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2699 | Date: 21-Sep-2003
Text Size
न जाने कितनी बातें उठ रही है मन मैं, प्रभू तुझे लेंके।
न जाने कितनी बातें उठ रही है मन मैं, प्रभू तुझे लेंके।
कहां से करुँ शुरूआत, अंत जो न हो मन मैं उठी बातों का।
एक जवाब पाऊं, उतने ही वख्त मैं जागे न जाने कितने सवाल।
कई बातों को भूल जाता हूँ, कई याद रह जाती है, उन्हीं के अनुरूप जीता हूँ जीवन।
कई बार उतार फेंका मन का लबादा, थोड़ी देर बाद खुद को उसी मैं लिपटा पाया।
अनंत से भी है अनंन्तगूनी बातें, अनंत मैं सारे जवाबों को पढ़ न पाऊँ।
हद हो गयी है बेहद तंग जीवन की, राहत नहीं है मेरे जीवन में।
फिर भी अंतर मैं है विश्वास, जो करायेगा मुझसे सारे प्रयास।
मद पड़े प्रकाश मैं लायेगा प्रभु तेरा परम प्रकाश, जो जगमगायेगा मेरे जीवन को।
आज ही आज मैं होगा, जो कर देगा अंतहीन सारे मन के कयासों का।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
Every where in this world, sargam, scream, scream…
Next
ला ला ल ला, जीवन एक संगीत है, और आत्मा एक गीत है।
*
*