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Hymn No. 2700 | Date: 21-Sep-2003
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ला ला ल ला, जीवन एक संगीत है, और आत्मा एक गीत है।
ला ला ल ला, जीवन एक संगीत है, और आत्मा एक गीत है।
पिरोना पड़ता है दोनो को एक लय मैं, तो हो जाते हैं मधुर सारे पल।
जिसके अंदर बजे, ओर जो इसे सुने, दोनों मस्त रहते हैं इनकी मस्ती मैं।
जीवन जैसे जैसे गुजरता है, अंतर का तरन्नुम बाहर भी मुखरित होता है।
क्या जीव क्या अजीव, मानो सारी सृष्टि इसके लय पे झूमती है।
वहां कुछ नहीं होता है, सब करने पे भी अनहद नाद गूंजता है।
शुरूआत कुछ मद्धिम् मद्धिम् पर बाद मैं कुछ तेज अनंत गीत होता है।
उलझन से भरे पलों मैं भी गूंजे, क्योंकि उलझन अंतर मैं नहीं होता है।
कभी भी कुछ हो, कही भी रहो, जहाँ पड़ी लत फिर वो नहीं छूटता है।


- डॉ.संतोष सिंह