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Hymn No. 2701 | Date: 21-Sep-2003
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जा...रे, जारे जा जा जा रे, जहाँ में जहाँ भी तू जायेगा, मुझे तू पायेगा।
जा...रे, जारे जा जा जा रे, जहाँ में जहाँ भी तू जायेगा, मुझे तू पायेगा।
जली है अंतर मैं प्रेम ज्योत, मेरे बिन तू कहीं न रह पायेगा।
निकलेगा दिलसे प्रेम गीत ऐसा, जिसे सुनने तू दौड़ा चला आयेगा।
खत्म हो जायेगी मेरे जीवन की सारी उधेड़बून, प्यार की मस्ती मैं गाऊंगा।
मस्ती मैं झूमैंगे जीवन के सारे पल, सुरों को प्यार मैं पिरोता चला जाऊँगा।
गुनगुनाहट होगी अंतर मैं, लब्जों पे उभरेंगे प्रभु तेरे प्यार के गीत बनके।
सुर देगे धड़कते दिल, मन मैं उमगो की प्यार भरी जो बरसात होगी।
युं ही रमते हुये, तेरे सपनो मैं रंग प्यार के भरता चला जाऊँगा।
मौत भी न रोक पायेगी, अंतहीन जीवन के बदलते स्वरुपों की शुरूआत होगी।
लब्जों से परे दिल ही दिल मैं, दिल की प्यार भरी नई नई बात होगी।


- डॉ.संतोष सिंह